क्या है हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना जो बाबा बागेश्वर ने बताई?

क्या है हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना जो बाबा बागेश्वर ने बताई? बाबा बागेश्वर ने हनुमानजी के एक अद्भुत चमत्कार की कथा सुनाई. उत्तर प्रदेश का एक ट्रेन ड्राइवर हनुमानजी की भक्ति में इतना लीन हुआ कि छह दिन तक ड्यूटी पर नहीं गया लेकिन जब वह नौकरी छोड़ने पहुंचा, तो पता चला कि उसकी हाजिरी रोज लगती रही और ड्यूटी भी चलती रही.

बाबा बागेश्वर के अनुसार, भक्त की जगह स्वयं हनुमानजी ने ट्रेन चलाकर उसकी ड्यूटी पूरी की. कलयुग में हनुमानजी के चमत्कार और उनकी कृपा से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख धार्मिक कथाओं और प्रवचनों में सुनने को मिलता है. उनमें से एक उत्तर प्रदेश का एक ट्रेन ड्राइवर घटना भी है जो बाबा बागेश्वर ने बतायी.

क्या है हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना जो बाबा बागेश्वर ने बताई?

हनुमानजी की भक्ति और ट्रेन ड्राइवर की अनोखी कहानी
                                            हनुमानजी की भक्ति और ट्रेन ड्राइवर की अनोखी कहानी

 

इस घटना में एक रेलवे ड्राइवर की हनुमानजी के प्रति गहरी भक्ति और उसके बाद सामने आए एक ऐसे प्रसंग का जिक्र है, जिसे बाबा बागेश्वर ने हनुमानजी की कृपा से जुड़ी घटना के रूप में सुनाया. आखिर क्या है यह घटना और कैसे एक भक्त के मंदिर में रहने के बावजूद उसकी नौकरी से जुड़ा काम होता रहा? आइए, पूरी घटना जानते हैं.

बाबा बागेश्वर ने सुनाई हनुमानजी की सच्ची घटना

बाबा बागेश्वर कहते हैं कि हनुमानजी कलयुग के देवता हैं। उनकी शक्ति अपरंपार है। जो भक्त हनुमानजी, बजरंगबली की भक्ति सच्चे मन से करेगा, संकटमोचन उसका बेड़ा पार करेंगे।

बाबा बागेश्वर अक्सर अपनी कथाओं में पवनपुत्र हनुमान की आराधना और उनके आशीर्वाद का वर्णन करते हैं। उनका कहना है कि हनुमानजी आज भी हैं और अपने भक्तों की मदद करने आते हैं।

उन्होंने कई ऐसी घटनाओं का जिक्र किया है। उन्हीं घटनाओं में से एक घटना का जिक्र यहां करने जा रहे हैं। आप इसे पूरा पढ़ें। बाबा बागेश्वर ने ऐसी घटनाएं सुनाई हैं, जिन्हें सुनकर या पढ़कर आप भी प्रभावित हो सकते हैं। यह घटना किसी चमत्कार से कम नहीं लगती।

उत्तर प्रदेश की एक घटना है

हनुमानजी की भक्ति में लीन था रेलवे ड्राइवर

उत्तर प्रदेश की एक घटना है। ट्रेन चलाने वाला एक युवक था, उसका नाम पवन था। ट्रेन का ड्राइवर पवन गांव का रहने वाला था। वह ट्रेन चलाता था और ट्रेन से आता-जाता था, लेकिन हनुमानजी की भक्ति करते-करते वह रेलवे का ड्राइवर बना था। हनुमानजी की भक्ति में उसका बड़ा मन लगता था।

रात भर हनुमानजी के लिए बैठा रहता। सुबह से पहले हनुमान चालीसा पढ़ता था और हनुमानजी का दर्शन करता था। फिर स्टेशन पहुंचकर रेल चलाने लगता था। शाम को लौटते वक्त फिर बजरंगबली के दर्शन करता था।

लौटते वक्त चाहे जितने बज जाएं, लेकिन बिना दर्शन किए नहीं आता था। समय बदलता रहता। रात को भी पूजन, जप-तप करने लगा। धीरे-धीरे उसका मन संसार से दूर होने लगा।

वैराग्य जागृत होने के बाद मंदिर में रहने लगा

कुछ दिन बाद उसके मन में वैराग्य जागृत हो गया। उसका गांव जंगल में था और उसी के बीच एक हनुमानजी का मंदिर भी था। फिर वह जंगल के बीच में हनुमानजी के मंदिर में जाकर रहने लगा।

इसके बाद वह वहीं स्थायी रूप से रहने लगा। एक बार दो दिन, तीन दिन वहीं बैठा रहा। नींद आए तो सो जाए। वहीं बैठकर जप करने लगा।

घरवाले बड़े परेशान हो गए। उसके खिलाफ बोलने लगे। घरवालों को पैसे की चिंता थी। उससे कहने लगे, “जाओ भाई, नौकरी करने जाओ। तभी तो मिलेगा। जब मिलेगा तभी तो हम लोगों का पेट चलेगा।”

घरवाले उसे खूब गाली-गलौज करने लगे। पर वह बेचारा सीधा, सरल और सज्जन आदमी कुछ नहीं बोला। प्रतिदिन भगवान का भजन करने में जुटा रहा। वह हनुमानजी का भजन कर भक्ति में लीन रहने लगा।

वह रेलगाड़ी चलाने नहीं जाता। घर वाले रोने लगे, माता जी रोने लगीं। गाली दी, मारपीट की, पर वह घर ही न जाए और मंदिर में हनुमानजी की भक्ति में लीन हो गया।

छह दिन बाद उसे नौकरी की चिंता हुई

पांच-छह दिन बाद उसे होश आया। बिल्कुल सत्य घटना सुना रहे हैं। पांच-छह दिन बाद उसको होश आया कि हम रेलगाड़ी चलाने नहीं गए।

उसे चिंता हुई कि सरकार से वेतन मिलेगा। यह व्यर्थ की वेतन होगी। फिर उसने योजना बनाई कि क्यों न नौकरी ही छोड़ दे।

ऐसा सोचकर वह एक दिन इस्तीफा देने स्टेशन मास्टर के पास गया। जेब से इस्तीफा निकाला और कहा, “क्षमा करो साहब, अब हम रेलगाड़ी चलाने नहीं आ पाते हैं। छह दिन छुट्टी हो गई है। अचानक से आ नहीं पाए। आगे भी हम नहीं आ पाएंगे। इसलिए हमारा इस्तीफा स्वीकार कर लो।”

स्टेशन मास्टर ने बताई हैरान करने वाली बात
ड्राइवर ने कहा—मैं छह दिन से ड्यूटी पर नहीं आया

पवन ने कहा, “हमसे भूल हो जाती है। इसलिए हम व्यर्थ की बेफिजूल की वेतन नहीं लेना चाहते। आप हमारा इस्तीफा स्वीकार कर लो।”

स्टेशन मास्टर बोला, “पागल हो क्या?”

“तुम कह रहे हो छह दिन से रेलगाड़ी चलाने नहीं आए। अरे, रोज तो तुम रेलगाड़ी चलाने आते हो। अभी-अभी तो थोड़ी देर पहले तुम रेलगाड़ी छोड़कर गए हो। इंजन को छोड़कर गए हो। अभी-अभी तुम हस्ताक्षर करके गए हो और तुम कह रहे हो कि हम छह दिन से नहीं आ पाए?”

“तुम्हारा दिमाग तो ठीक है? अभी-अभी तो गए हो। यही कपड़े पहनकर गए।”

ड्राइवर ने कहा, “आपको गलतफहमी हुई होगी। हमारा शरीर आपको दिखाई पड़ रहा है कि हम रेलगाड़ी चलाने आए थे। देखो, दाढ़ी बढ़ गई है। हमें ध्यान ही नहीं है। हम आए ही नहीं। हम मंदिर में रहे।”

स्टेशन मास्टर बिगड़कर बोला, “तुम पागल हो गए। तुम्हारी मानसिक स्थिति ठीक है? जो इस्तीफा लेकर आ गए। अरे, रोज तुम रेलगाड़ी चलाने आते हो।”

रजिस्टर में मिले छह दिनों के हस्ताक्षर

उसने कहा, “जरा रजिस्टर दिखाओ। हम अपने हस्ताक्षर चेक करें।”

जैसे ही रजिस्टर उठाया, उसने अपने हस्ताक्षर देखे। उसकी आंखों से टप-टप आंसू बहने लगे।

कोई और नहीं। हम मंदिर में हनुमानजी की पूजा करते रहे और हमारे बदले हनुमानजी ड्यूटी निभाते रहे।

वाह! वाह! धन्य है, धन्य है, धन्य है!

इतना सुनते ही जब उसने रजिस्टर में छह दिन के हस्ताक्षर देखे, तो कहा कि ये हस्ताक्षर हमारे अलावा कोई और नहीं कर सकता है। ये हमारे साइन हैं, लेकिन इनको हमारे अलावा यदि कोई बना सकता है, तो केवल हनुमानजी बना सकते हैं।

शायद उनसे रहा नहीं गया होगा। हम वहां पूजा करते रहे और वो यहां रेलगाड़ी चलाने आ गए।

ऐसी अनेक घटनाएं, सत्य घटनाएं, कलयुग की हैं।

घटना से जुड़ी मुख्य बातें
बाबा बागेश्वर ने प्रवचन में हनुमानजी से जुड़ी इस घटना का वर्णन किया।
कहानी में पवन नाम के एक रेलवे ड्राइवर का उल्लेख है।
पवन हनुमानजी की भक्ति में काफी समय बिताने लगा था।
बाद में वह जंगल के बीच स्थित हनुमानजी के मंदिर में रहने लगा।
कई दिनों तक मंदिर में रहने के बाद उसे अपनी नौकरी की चिंता हुई।
स्टेशन मास्टर ने बताया कि वह उन दिनों भी ड्यूटी पर आया था।
रजिस्टर में उसके हस्ताक्षर देखकर पवन भावुक हो गया।
बाबा बागेश्वर ने इस घटना को हनुमानजी की कृपा से जुड़ी घटना के रूप में सुनाया।
सारांश

बाबा बागेश्वर द्वारा सुनाई गई यह घटना हनुमानजी की भक्ति और उनकी कृपा से जुड़ी एक भावुक कर देने वाली कथा है। कहानी के अनुसार, पवन नाम का एक रेलवे ड्राइवर हनुमानजी की भक्ति में इतना लीन हो गया कि वह कई दिनों तक जंगल के बीच स्थित मंदिर में रहने लगा। बाद में जब वह नौकरी छोड़ने स्टेशन पहुंचा, तो स्टेशन मास्टर ने बताया कि वह उन छह दिनों में भी नियमित रूप से ट्रेन चलाने आया था। रजिस्टर में छह दिनों के उसके हस्ताक्षर देखकर पवन हैरान रह गया। बाबा बागेश्वर ने इस प्रसंग को हनुमानजी की कृपा और चमत्कार से जुड़ी घटना के रूप में सुनाया।

FAQ — हनुमान जी के चमत्कार की सच्ची घटना
हनुमान जी के चमत्कार की यह घटना किसने सुनाई?

यह घटना बाबा बागेश्वर महाराज द्वारा अपने प्रवचन में सुनाई गई है।

इस घटना में रेलवे ड्राइवर का नाम क्या था?

बाबा बागेश्वर द्वारा सुनाई गई कहानी के अनुसार रेलवे ड्राइवर का नाम पवन था।

पवन हनुमानजी की भक्ति कैसे करता था?

कहानी के अनुसार पवन सुबह से पहले हनुमान चालीसा पढ़ता था, हनुमानजी के दर्शन करता था और शाम को लौटते समय भी बजरंगबली के दर्शन करता था।

पवन मंदिर में क्यों रहने लगा?

कहानी के अनुसार धीरे-धीरे उसके मन में वैराग्य जागृत हुआ और वह जंगल के बीच स्थित हनुमानजी के मंदिर में रहने लगा।

छह दिन तक पवन की जगह ट्रेन कौन चला रहा था?

बाबा बागेश्वर द्वारा सुनाई गई घटना के अनुसार पवन का मानना था कि जब वह मंदिर में हनुमानजी की पूजा कर रहा था, तब उसकी जगह हनुमानजी ड्यूटी करने आए थे।

क्या यह घटना वास्तव में हुई थी?

यह घटना बाबा बागेश्वर द्वारा प्रवचन में सुनाई गई कथा के रूप में प्रस्तुत की गई है। इस लेख में इसे उसी संदर्भ में बताया गया है।

इस घटना का क्या संदेश मिलता है?

इस कथा का मुख्य संदेश हनुमानजी के प्रति श्रद्धा, भक्ति और विश्वास से जुड़ा है।

बाबा बागेश्वर हनुमानजी के बारे में क्या कहते हैं?

कथा के अनुसार बाबा बागेश्वर हनुमानजी को कलयुग के देवता और संकटमोचन मानते हैं तथा कहते हैं कि सच्ची भक्ति करने वाले भक्तों पर उनकी कृपा रहती है।

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